
लखनऊ: सोलहवीं लोकसभा के लिए चुनाव का बिगुल बजते ही जांच एजेंसियों ने अपनी नजरें चुनाव में इस्तेमाल होने वा बलैक मनी पर जमा दी हैं। निर्वाचन आयोग के निर्देश पर जहां आयकर विभाग राजनेताओं के बैंक खातों पर पैनी नजर रख रहा है, वहीं दूसरी ओर नेताओं को अब आवागमन के दौरान उनके पास मौजूद पैसों का हिसाब भी उन्हें देना पड़ेगा।
जांच के दायरे में एयरपोर्ट भी आएंगे जहां घरेलू व प्राइवेट विमानों से आने वाले राजनेताओं के सामान की तलाशी ली जा सकती है। इधर निर्वाचन आयोग इस बार उन व्यापारियों को राहत देने की योजना बना रहा है जो व्यापार के लिए पैसा लेकर आवागमन करते हैं। स्थानीय पुलिस को इस बाबत आगाह किया जाएगा कि वे बिना वजह व्यापारियों को परेशान न करें व बरामद राशि का सही जरिया पता होने पर उसे जब्त करने की कार्रवाई से बचें।
चुनाव में कालेधन का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है। प्रदेश में वर्ष 2012 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान पुलिस ने विभिन्न स्थानों से करीब 52 करोड़ रुपये जब्त किए थे। इनमें से ज्यादातर धनराशि व्यापारियों की थी जबकि कई स्थानों पर राजनीतिक दलों का झंडा लगी गाडिय़ों से भी लाखों रुपये पकड़े गए थे। खासतौर पर चुनाव के दौरान व्यापारियों को होने वाली दिक्कतों को देखते हुए राजनीतिक दलों ने भी आयोग से आग्रह किया है कि इस बारे में स्पष्ट दिशा निर्देश पुलिस को दिए जाएं।
आयोग ने इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने को कहा है। वहीं कालेधन की धरपकड़ के लिए आयोग ने आयकर विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे राजनेताओं व प्रत्याशियों के बैंक खातों पर नजर रखें। आयकर विभाग इसके लिए प्रत्येक जिले में विशेष सेल बनाने की तैयारी में जुटा है। चुनाव में अपना भाग्य आजमाने वाले प्रत्याशियों को आयोग ने अधिकतम पचास हजार रुपए लेकर आवगमन करने की छूट दी है। इससे ज्यादा रकम होने पर उसे जब्त कर लिया जाएगा। आयोग ऐसा खुफिया तंत्र भी विकसित करने की तैयारी में है जिसकी मदद से यह जाना जा सके कि कौन सा प्रत्याशी मतदाताओं को लुभाने के लिए उन्हें पैसों का प्रलोभन दे रहा है।
